A Cup of Tea Contains The Immeasurable

We can put this phenomena in a different way. The objects exist there already. The mind has no way to identify the objects other than measurements. Measurement is not related to the existence of an object but has a deep relation to identification of objects.

The whole process of identification is based on measurement. What can one say about the things which are immeasurable? Can the mind imagine or think the existence of an immeasurable thing?

If an object has a shape, it must be limited. The limits of an object create the shape. The shape of an object is directly related to measurement. And if measurement is possible, then mind can identify the object through comparison and difference. So one can say that the mind is not able to understand the limitless or immeasurable. The act of measurable is performed by the thoughts in one’s mind. Thoughts are limited and measurable, so thoughts can never go beyond their own limits.

Mind is able to understand the shapes but does it understand the content inside a shape. Shapes are just outside limits of an object but there is a content too inside the shape. Does the mind identify that content?

One can see a cup of tea very easily. One can identify the shape and color of cup. It is so much easy for the brain to understand the limits of cup.

The shape of cup contains an emptiness inside the limits. Without that emptiness the cup has of no use. You cannot pour tea or milk inside the cup if it does not contain emptiness. If we think deeply about the whole phenomena, can understand that the shapes are created just to hold the emptiness inside the cup. So, in reality, the cup is just an emptiness and nothing else.

The emptiness of cup cannot be measured directly by the brain. Emptiness is immeasurable, so the mind cannot identify it. To measure the emptiness of cup, the mind observes the shapes of cup. And out of measurement of shapes, mind just imagines the emptiness.

Cup of tea is a good example to understand the measurable and immeasurable. The shapes are measurable and the emptiness hold by shapes is immeasurable. We can understand the limits of mind by this example.

But it is not enough. Does the mind identify the content? It is really difficult to explain into words. How does the mind look at thoughts? How does the mind look at memory, fear, pain, idea, concept etc? How does the mind look the reality? Is it only considered with the outside? It is obvious that a thing is not just outside. If the mind is considered only with the outside, it is not looking the whole. It is overlooking something which is far more important than the shape.

How do you observe yourself? When you observe your mind or brain, do you look inside or just observe the outside shape? It seems so much simple but it is a great problem to understand the reality. Because the reality is not just a shape but a whole movement. A movement which is put together by measurable, immeasurable and just between the both.

Being aware of whole movement of reality, an understanding takes place that the mind itself is a barrier in between one and reality. There is no other barrier except the mind itself.

सुंदरता और फैशन पर कुछ विचार

प्यारे दोस्तों, आज मैं आपसे बात करना चाहता हूं ब्यूटी और फैशन के बारे में। हम कहते हैं कि कोई व्यक्ति बहुत सुंदर है, कोई वस्तु बहुत सुंदर है, या कोई फैशन प्रचलन में है। हमें किसी भी वस्तु या व्यक्ति के बारे में कैसे पता चलता है कि वह सुंदर है? सुंदरता के क्या मायने हैं? सुंदरता का क्या अर्थ है? कोई सुंदर है या कुरूप है यह कैसे निर्धारित किया जाता है? आज मैं आपसे इसी विषय में कुछ विचार साझा करना चाहता हूं।

हिंदी भाषा पर मेरे कुछ विचार

नमस्ते दोस्तों, आज मैं आपसे हिंदी भाषा के बारे में कुछ बात करना चाहता हूं। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मेरी एक वेबसाइट भी है जिस पर मैं न्यूट्रिशन से संबंधित जानकारी देता हूं। यह वेबसाइट अंग्रेजी भाषा में है। मैं न्यूट्रिशन पर एक पुस्तक भी लिख रहा हूं, यह पुस्तक भी अंग्रेजी भाषा में लिख रहा हूं। कल शाम को मैं इन सब के बारे में सोच रहा था तो भाषा और ज्ञान को लेकर मेरे मन में कुछ विचार पैदा हुए। यह विचार मैं आपसे साझा करना चाहता हूं और जानना चाहता हूं कि आपकी इन विचारों पर क्या राय है।

हिंदी भाषा में अच्छी जानकारी उपलब्ध नहीं है

पहला विचार यह है कि हिंदी भाषा में अच्छी जानकारी उपलब्ध नहीं है। अगर हम इंटरनेट पर देखते हैं तो जो भी वेबसाइट हैं सभी अंग्रेजी भाषा में हैं। अगर हम पुस्तकों की बात करें तो जो भी अच्छी पुस्तकें हैं सभी अंग्रेजी भाषा में हैं। हिंदी में बहुत ही थोड़ी जानकारी दी गई है और जो जानकारी दी गई है उसकी भी गुणवत्ता इतनी अच्छी नहीं है। मेरे पास काफी बार दोस्तों के फोन आते हैं जो पूछते हैं कि न्यूट्रिशन पर या फिलॉसफी पर किसी अच्छी हिंदी पुस्तक का नाम बताइए, तो मैं उनसे यही कहता हूं कि साइंस पर न्यूट्रिशन पर या फिलॉसफी पर हिंदी भाषा में अच्छी पुस्तकें नहीं मिलेंगी क्योंकि अच्छी पुस्तकें सिर्फ अंग्रेजी भाषा में लिखी गई हैं।

जो दूसरे देश हैं वह अपनी अपनी भाषा से कितना प्रेम करते हैं

दूसरा विचार मेरे मन में यह आया कि जो दूसरे देश हैं वह अपनी अपनी भाषा से कितना प्रेम करते हैं। मुग़ल जब हमारे देश में आए थे तो उन्होंने हमारे देश का जो भी साहित्य था, उसको उर्दू और अरबी भाषा में अनुवादित कर लिया। जब अंग्रेज हमारे देश में आए थे तब उन्होंने भी हमारे देश का जो साहित्य था, वेद और उपनिषद थे और जो भी अच्छी पुस्तकें थी, सबको अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर लिया। ऐसा करके वह अपने लोगों के ज्ञान को, अपनी भाषा को विकसित करना चाहते थे। चीन और जापान के बारे में आप जानते होंगे वह कभी दूसरी भाषा नहीं सीखते। उनका सारा सिस्टम उनकी अपनी भाषा में चलता है। ऑक्सफ़ोर्ड वर्ल्ड क्लासिक्स का नाम आपने सुना होगा। यह ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की एक शाखा है जो पूरे विश्व में से सभी अच्छी पुस्तकों का चयन करता है, फिर उनका अपनी भाषा में अनुवाद करता है।

किसी भी भाषा महत्व इस बात से होता है कि कितने लोग उस भाषा को बोलते हैं और उस भाषा में कितनी जानकारी उपलब्ध है। जैसे हम संस्कृत की बात करते हैं तो संस्कृत का जो व्याकरण है वह बहुत ही उन्नत है, लेकिन संस्कृत बोलने और समझने वाले लोग नहीं हैं और ना ही संस्कृत में कोई जानकारी आज उपलब्ध है। इसलिए इतनी अच्छी भाषा होने के बाद भी संस्कृत गुम हो गई है।

हम हिंदी भाषा में क्यों नहीं लिखते

तीसरा विचार यह था कि हम हिंदी भाषा में क्यों नहीं लिखते। जिन लोगों को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है वह हिंदी में कभी नहीं लिखते और उनकी हिंदी इतनी अच्छी भी नहीं है। जिन लोगों को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं है, वह अंग्रेजी पुस्तकें नहीं पढ़ पाते और हिंदी में अच्छी पुस्तकें ना मिल पाने की वजह से उनका ज्ञान कम रह जाता है और फिर वह जो भी लिखते हैं वह इतना अच्छा नहीं लिख पाते। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनकी पकड़ दोनों भाषाओं पर अच्छी है। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं को अच्छे से समझ सकते हैं। लेकिन ऐसे लोग हिंदी भाषा को छोटा मान लेते हैं और जो भी लिखते हैं अंग्रेजी भाषा में लिखना पसंद करते हैं। उनकी ऐसी सोच का कारण कुछ भी हो सकता है। यह हमारा नज़रिया हो सकता है कि हम सोचते हैं कि जिसे अंग्रेजी आती है तो उसके पास ही ज्यादा ज्ञान है और ऐसा सोचना कहीं ना कहीं सही भी है। क्योंकि जो भी उच्च कोटि की पुस्तकें हैं वह सभी अंग्रेजी भाषा में है। तो जिस व्यक्ति को अंग्रेजी आती है उसके लिए ज्ञान प्राप्त करना आसान है।

कल शाम से मैं यह सोच रहा हूं कि जिन लोगों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाएं आती हैं उन्हें इनके बीच की दूरी को कुछ कम करना चाहिए। उन्हें जो भी ज्ञान अंग्रेजी में पुस्तकें पढ़ने से मिला है उसको हिंदी भाषा में शेयर करना चाहिए। क्योंकि सिर्फ किसी भाषा की वजह से कोई व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करने से वंचित नहीं रहना चाहिए। हम जैसे लोग जिन्हें दोनों भाषाओं का ज्ञान है हमें याद करना चाहिए कि जब हमने अंग्रेजी सीखी थी तो वह हिंदी की मदद से सीखी थी। हमारी पुस्तक में एक तरफ अंग्रेजी और एक तरफ हिंदी होती थी जिससे हमें अंग्रेजी समझ में आने लगी। अगर हिंदी भाषा ने हमें मदद ना की होती तो आज हम अंग्रेजी ना समझ पाते। लेकिन सोचने की बात यह है कि जिस सीढ़ी को लगाकर हम छत तक पहुंचे हैं, उस सीडी के महत्व को हम भूल गए हैं।

कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि हिंदी पढ़ने वाले लोग बहुत कम है

चौथा विचार यह है कि कुछ लोग यह भी सोचते हैं कि हिंदी पढ़ने वाले लोग बहुत कम है। लेकिन मुझे लगता है कि ऐसी बात नहीं है। गूगल के हिसाब से पूरी दुनिया में ही 50 करोड़ से भी ज्यादा ऐसे लोग हैं जो हिंदी लिख सकते हैं, पढ़ सकते हैं। हिंदी भाषा में जो फिल्में रिलीज होती हैं, वह एक ही दिन में 100 करोड़ की कमाई कर लेती हैं। अगर हिंदी समझने वाले लोग ना होते तो क्या ऐसा हो सकता था? हॉलीवुड की जो फिल्म है वह भी हिंदी भाषा में डब होती हैं, हमारे देश में रिलीज होती हैं और करोड़ों लोग उनको देखते हैं। हर रोज करोड़ों हिंदी के समाचार पत्र छपते हैं और पूरे देश में बिकते हैं। तो मुझे नहीं लगता कि हिंदी समझने वाले लोग कम हैं।

मुझे एक बात याद आती है, एक बार मैं अपने एक दोस्त के साथ कहीं बैठा था और साथ में मेरे दोस्त का बेटा भी था। मेरे दोस्त ने अपने बेटे से पूछा कि बेटा यह कौन सा रंग है, तो उस छोटे से बच्चे का जवाब था, काला। काला शब्द सुनकर मेरे दोस्त ने अपने बेटे को डांट दिया। उसने अपने बेटे को कहा कि इसको काला नहीं कहना है, इसको ब्लैक कहना है। उस समय मैं सोच रहा था कि उस बच्चे के दिमाग में हिंदी भाषा को लेकर क्या छवि बनेगी। मेरे मन में यह भी विचार आया कि यह सब क्यों हो रहा है। हम अपनी ही भाषा को इतना छोटा क्यों समझते हैं। क्या आपने कभी ऐसा कुछ देखा है या कभी गौर किया है?

इन सब बातों को सोच कर मेरे मन में यह विचार आ रहा है कि हम जो भी ज्ञान साझा करते हैं, वह हमें हिंदी में करना चाहिए। ऐसा करने से हिंदी भाषा समृद्ध होगी और हिंदी भाषा को अपनी अलग पहचान मिलेगी। फिर कभी किसी को यह शिकायत भी नहीं होगी कि हिंदी में अच्छी जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे लोग जो अंग्रेजी नहीं पढ़ पाते उनके लिए भी ज्ञान प्राप्त करना आसान हो जाएगा।

आपका इस बारे में क्या विचार है कृपया सांझा कीजिये। धन्यवाद।

Elephant Death, Cow and Hypocrisy

As you already know about the death of a pregnant elephant in Kerala. After her death, everyone is talking about her on television, social media, and newspapers. Every person is downhearted after listening about this intensely painful incident. While typing these words, I came to know about one more brutal incident of a cow in Himachal Pradesh.

I have been thinking about all these things and I have many questions in my mind. I want to ask you these questions. Maybe you can help me to find out any answer.

The first question is, why are we feeling sad about this news. We eat so many animals like chicken, pork, beef, fish, etc. You already know how the chicken is made. We cut off the head of a bird. We mercilessly nip off all the feathers from its body. We remove its flesh. We have highly qualified and trained chefs who have great experience in cooking these animals. Such chefs know very well how to prepare this flesh and which ingredients to add to make it tasty. This flesh is served elegantly. Then we eat these bodies of dead animals with a fork and knife, with good dining manners.

Maybe the people who killed the elephant are mentally sick and illiterate, but we are intelligent, rational, and educated people. So why are we doing such things? If an ill-minded, illiterate person kills an animal, it is wrong. If an intelligent and rational person, kills and eats bodies of dead animals, it is right. Why this is so?

Some people are crying because the elephant was pregnant. But don’t we remember how many fetuses we have killed in wombs? Even we have an official name for this crime, abortion. Maybe the people who killed the elephant were not aware of her pregnancy. But what is our case? We kill a child in a womb, consciously, deliberately, in a pre-planned manner. We have highly qualified doctors who have studied everything to become an expert to perform such crimes. They already know about all the complications and well trained to solve each one. We, parents, doctors, and other staff kill a baby in the womb. We don’t feel sad about these things. But when a child dies in an elephant’s womb, we all do this drama. Why?

I think, there are three reasons for our such behavior. The first reason is when we see something every day we take it casually. When we were children, raining was a miracle for us. We used to think about how this is happening. From where this all water is coming from? But after seeing raining so many times, our wonder has gone. Now we take this miracle casually. Suppose, you went to the market. There you saw a beautiful painting. You purchased that painting and fixed it in your living room. You will see that painting only for 2-3 days, after that you will never observe its beauty. The same is with eating dead bodies, abortion, and many more things. We watch and listen to these things every day, so these are just day to day things for us. We are so habitual to it that we don’t bother to think about it deeply.

The second reason can be of majority. We think that, if a particular ideology or action is accepted by the majority of people then it is right. One day, one person killed one animal. So it is wrong. Every day, the majority of persons, kill so many animals. It is right.

The third reason can be of self-importance. For a person, he is the most important person on earth. When he thinks about his actions, he thinks in a very lenient way. But when he thinks about other persons, he thinks mercilessly. To understand the truth, we have to think about our actions, mercilessly. Otherwise, we will never be able to observe ourselves rightly.

Or maybe we are just ignorant and lazy.

Some readers will think that I am against non-vegetarian food or abortions. But trust me, I am neither defending nor confronting any ideology. I just want to ask, why do we think in such a biased way? Why do we judge our actions in one way and others’ actions in a different way? Why do we live such a hypocrite life?

Reading and Writing

I am reading the book “Bad Pharma: How Drug Companies Mislead Doctors and Harm Patients” by author Ben Goldacre. A book that reveals the dark side of the pharmaceutical industry. How drug companies provide wrong information that leads to wrong treatment decisions, patients’ sufferings, and deaths.

I am posting book updates on Twitter in a long thread. You can read this thread here. I think this is a very good way to learn more things in one act. I am reading this book every day for 60 minutes then I put the book down and write whatever I can recall from that 60 minutes reading. I use a pen and paper to write all the key points and major ideas.

This method will help me to improve my language skills as I am not good at English. It will also help me to understand and grasp key ideas from a text. It will enhance my recall capacity, writing, and explaining skills. More than this, when I will post my updates on twitter, readers will get the motivation to read more books.

If you want to learn writing beautiful paragraphs, you have to read and write every day. This is an excellent way of learning.

I have deleted all my previous posts on this blog and have made a new way to learn and write new things. Thank you.